Hing ke labh tatha haani: हींग के लाभ तथा हानि

अगर आपने कभी हींग देखा होगा तो हींग का नाम आते ही उसकी महक दिमाग में घूम जाती है. आपने यह दो तरह का देखा होगा या तीन तरह का भी एक तो पत्थर के रूप में, दूसरा गम के रूप में, तथा अब तो मार्केट में पाउडर वाला हींग आ गया है. दोस्तों हींग बहुत ही फायदेमंद खाद्य पदार्थ है. इसमें जबरदस्त औषधीय गुण भी होते हैं. प्यारे दोस्तों आज हम हींग के बारे में जितने भी सवाल आपके दिमाग में आ रहे होंगे वह सब क्लियर करने वाले हैं, तो पूरे प्यार से हमारा यह लेख पढ़ते जाइए और सवालों का जवाब लेते जाइए.

हींग कहां से आता है?

निश्चित रूप से आपका पहला सवाल यही होगा कि यह हिंग आखिर आता कहां से है. दोस्तों हींग एक वनस्पति है. पौधे से प्राप्त होने वाला पदार्थ है. इसे शाकाहारी कहते हैं. यह उगाया जाता है. पूरे विश्व का आकलन करें तो यह भूमध्य रेखा से मध्य एशिया महाद्वीप तक इसकी खेती होती है.

यह तो हुआ वैश्विक भौगोलिक स्थिति अगर केवल भारत देश की बात करें तो यह थोड़ा कठिन सा महसूस होगा. क्योंकि भारत में हींग की खेती का दर बहुत न्यून है. चुकी हींग की खेती के लिए ठंड और शुष्क दोनों तरफ भी जलवायु अनिवार्य होती है. इसलिए यह कश्मीर और पंजाब के कुछ इलाके में नाम मात्र का उगाया जाता है. अब आप सोच रहे होंगे कि जब यहां उगाया नहीं जाता तो भारत में इतना हींग प्रयोग मैं कैसे आता है.

प्यारे पाठको हींग का इतिहास भी हम बताने वाले हैं. उससे पहले मैं यह बता दूँ कि हींग की खेती भारत में सिर्फ नाम मात्र में होती थी. लेकिन अभी हाल ही में हिमांचल प्रदेश की एक संस्था काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की सबसे अच्छी पहल यह है कि अब हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति क्षेत्र में 300 हेक्टेयर पर हींग की खेती होगी. यह विश्व स्तर पर बहुत बड़ा व्यवसाय बनेगा. लेकिन इसके पहले तक में ईरान अफगानिस्तान या उज्बेकिस्तान से आता था और अभी भी आएगा. जब तक जी हम भारतवासी खुद ही हींग की पर्याप्त उपज ना करने लगे दोस्तों भारत विश्व का सबसे बड़ा हींग आयातक देश है.

 हींग का इतिहास

बेहद ही दिलचस्प लगेगा जब आप यह जानेंगे कि हींग आया कहां से. प्यारे पाठको जब आप भारत का इतिहास पढ़ेंगे तो पता चलता है कि पश्चिम क्षेत्र से हमारे देश में सामंतों का आना जाना लगा रहता था. कभी व्यापार हेतु तो कभी युद्ध के लिए. उसी व्यापार के दौरान ही ईरान से आए व्यापारियों ने पहली बार हींग को हमारे देश में प्रसारित किया. हींग ईरानी मूल का पौधा है अर्थात या सबसे पहले ईरान में ही पाया गया. इसका साइंटिफिक नाम Ferula asofoetida  है. संस्कृत में हिनगू कहते हैं. अंग्रेजी में asafoetida कहते हैं. पूरे विश्व भर में है इसकी 125 प्रजाति है. मगर भारत में मात्र तीन प्रजाति ही पाई जाती है.

दोस्तों शुरू शुरू में तो यह हमारे देश में कम ही आयात होता था. मतलब उस समय ईरान से कम ही व्यापारी मंगाते थे मगर जैसे-जैसे इसकी औषधीय गुणों से लोग परिचित हुए आयात में बढ़ोतरी होने लगी. भारत वासियों ने भी इसकी खेती के बहुत प्रयास किए मगर अनुकूलित वातावरण ना होने के कारण इसकी उपज नगण्य में होने लगी. इसलिए लोग निराश पूर्ण होकर इसकी खेती के तरफ ध्यान देना ही बंद कर दिए. फिर भी ऊपर मैंने बताया है कि कश्मीर और पंजाब वाले कुछ हद तक खेती कर ही लेते थे. मगर अब काउंसिल सेंट काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ने यह बीड़ा उठाया है और बड़े पैमाने पर हिमाचल में इसका उत्पादन होगा.

 हींग कैसे बनता है

हमने ऊपर तो यह बताया ही है कि हींग पौधे से प्राप्त होता है. मगर यह बताना बाकी है कि पौधे के किस भाग से यह निकलता है. दोस्तों यह पौधे के प्रकन्द से निकले हुए दूध या एक तरल पदार्थ कह सकते हैं, को छानकर धूप में सुखा दिया जाता है. सूखने के बाद इसे अन्य खाद्य पदार्थ जैसे गोंदिया स्टार्च में मिला लिया जाता है. दोस्तों हींग का गंध सल्फर के कारण इतना तीक्ष्ण होता है कि आप इस की महक बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे. लेकिन इसमें अन्य खाद्य पदार्थ मिलाकर इसका पेस्ट या सॉलिड अवस्था मिलाकर ही से मार्केट में बेचते हैं. अब तो  जो मार्केट में हींग आ चुका है वह पूर्ण शुद्ध नहीं होता उसमें कुछ ज्यादा ही खाद्य पदार्थ का मिलावट होता है. दोस्तों शुद्ध हींग बहुत ही फायदेमंद होता है तथा बहुत सारे बीमारियों का बेहतर इलाज भी करता है.

 हिंग के फायदे

मेरे प्यारे साथियों अब हींग के फायदे के बारे मैं जान लेना बहुत ही जरूरी है. तभी तो फायदा भी होगा और हम स्वस्थ रहेंगे. यही नहीं दोस्तों अब आप हींग के फायदे जान लेंगे ना तो आज के बाद से हींग जरूर खरीद के अपने किचन में रख लेंगे.

 भोजन को स्वादिष्ट और पाचक बनाने में

जब हम हींग का प्रयोग खाने में करते हैं तो हमारा खाना सुगंधित स्वादिष्ट हो जाता है. साथ ही साथ अगर आपको अपच की समस्या होती है. तो यह इस समस्या को भी खत्म कर देता है और भोजन अच्छे से पचने में सहायता करता है.

कान के दर्द में

 जब आपका कान दर्द करे या सनसनाहट सा महसूस हो तो आप हींग के छोटे से टुकड़े को पानी में खूब पकाएं. जब हल्का गर्म रह जाए तब दो-दो बूंद कान में डालें. आप का दर्द दूर कर देगा. हींग का प्रयोग सरसों के तेल के साथ भी होता है जो कान ठीक करने में दर्द में सहायक हैं.

सर दर्द में

अगर आपका सर दर्द कर रहा है तो हींग को पीसकर हल्का हल्का सर पर लगाइए. थोड़ा सा खा कर गुनगुना पानी पीजिए और कभी-कभी नाक से भी हींग के तीक्ष्ण गंध को सूंघे आपके सर दर्द को तुरंत सही कर देगा.

पेट में हुए अन्य तरह के परेशानियों को खत्म करने में

अगर आपका पेट दर्द कर रहा है. आप थोड़ा सा हींग गुनगुना पानी के साथ अजवाइन को मिलाकर खाएं अगर पेट में पेचिश की शिकायत है. इसका हल्का सा घोल बनाकर पीए तुरंत असर करेगा. अगर आपके पेट में कीड़े हो जाय तो आप खाली पेट हींग का गर्म पानी से सेवन करें सारे कीड़े बाहर हो जाएंगे.

 फटी एड़ियां सही करने में

कभी-कभी अधिकांश लोगों की एड़ियां फटने लगती है. जो बहुत दर्द करती है. ऐसे में अगर आप भी इस परेशानी से जूझ रहे हो तो आपको नीम के तेल में हींग को पीसकर मिला लेना चाहिए, तथा सुबह-शाम लगाना चाहिए. बहुत शीघ्र ही लाभ होता है.

दाद खाद खुजली में

कभी कभार पसीने के जमने से या अन्य किसी बैक्टीरिया के कारण हमें दाद खाज हो जाते हैं, या खुजली भी हो सकती है. अगर आप दाद-खाज या खुजली से परेशान हैं और आयुर्वेदिक दवा चाहते हो. तो हींग को पीसकर पानी में मिलाइए गाढ़ा लेप बनाकर खुजली वाले स्थान पर लगाएं 1 हफ्ते में असर दिख जाता है.

 सीने में कफ जम जाने में या बलगम बनने में

अक्सर सर्दियों में हम कफ या बलगम से ज्यादा परेशान हो जाते हैं. बाहर दवा लेने जाने में दिक्कत हो तो किचन में रखे हींग को पीस के गर्म पानी डालकर लेप बनाएं तथा सीने पर लगाए साथ ही साथ गर्म पानी में हींग डालकर उसके बाप को नाक से खींचे तुरंत आराम मिलता है.

 हींग के कुछ छोटे-छोटे लाभ

  • दांत दर्द में आप हींग को दांत के पास लौंग के तेल में मिलाकर रखें शीघ्र ही लाभ होता है.
  • जब भी खाना बनाएं हींग डालकर बनाएं खुशबू के साथ सुपाच्य भोजन बनता है.
  •  कोरोना के दौर में प्रतिरक्षण या प्रतिजैविक शब्द का आपने समझा ही होगा. तो हींग प्रतिरक्षण क्षमता और प्रति जैविक क्षमता को मजबूत बनाता है. अतः खाने में सर्वदा प्रयोग करें.
  • बवासीर होने पर हींग का लैप फायदेमंद होता है.

 नोट- सारे उपयोग बहुत परख कर लिखे गए हैं फिर भीम उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लें.

 हींग के नुकसान

 प्यारे मित्रों प्रकृति का सबसे अनूठा तोहफा है. हींग इसे औषधि कहना गलत नहीं हो सकता. उपरोक्त मैंने सारे औषधीय गुण बताये हैं. वैसे तो हींग से नुकसान के नगण्य मामले आए हैं. फिर भी मैं आप को यह सूचित करना चाहूंगा कि हींग का अति सेवन मिचली, चक्कर, अतिरगर जैसे परेशानियों को दावत दे सकता है. जो कुछ देर में ठीक भी हो जाता है. फिर भी किसी भी वस्तु का अति सेवन ना करें तो बेहतर है. कि जो दवा हमें मात्रात्मक रूप से लेने में लाभ दे सकती है उसके ज्यादा मात्रा निश्चित रूप से कहीं ना कहीं हमारे शरीर में नुकसान ही पहुंचाएंगे.

अतः इसका जरूर ख्याल करें प्यारे मित्रों हींग पर यह हमारे लेख को आप 5 में से कितने स्टार देंगे कमेंट करें और अगर कोई सलाह हो तो हमें बताएं हम उस पर विचार करेंगे. अगर आप अन्य किसी विशेष विषय वस्तु पर भी कुछ जानना चाहते हो तो भी हमें बताएं हमें खुशी होगी.           

धन्यवाद

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