Rice Plant: चावल का पौधा

हेलो दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं एक बेहतरीन लेख। हालांकि नाम तो बहुत ही साधारण है जैसा कि आप देख सकते हैं आज हम बात करेंगे rice plant के बारे में। वैसे तो आप इसके बारे में बहुत अच्छी तरह से जानते ही होंगे लेकिन जो इसके बारे में आज हम बताएंगे वह बहुत ही खास होगा।

अभी आप सोच रहे होंगे चावल के बारे में क्या समझना है, तो मैं आपको बता दूं की ऐसी बहुत सारी बातें हैं जो आप नहीं जानते हैं।

दोस्तों आप चावल तो रोजाना खाते होंगे क्या कभी विचार आया की चावल आखिर कैसे पैदा होता है? या चावल पहले कब या कहां पैदा हुआ था तो आज आप चावल के बारे में बहुत सारी बातें जान जाएंगे।

 चावल कैसे पैदा हुआ?

चावल पूरे विश्व में बड़े चाव से खाया जाता है लेकिन यह बड़े सौभाग्य की बात है कि चावल के जन्म का इतिहास भारत से जुड़ा हुआ है। चावल के सर्वप्रथम साक्ष्य लोथल से प्राप्त हुए हैं जो कि गुजरात में स्थित है। दोस्तों साक्ष्य मिलने का मतलब यह है कि इतिहासकारों के अनुसार चावल पहले जंगली पौधों की तरह रहा होगा। हमारे आदिम युग के लोगों द्वारा इस को खाद्य पदार्थ के रूप में चिन्हित किया गया तथा इसके उपयोग की विधियों का खोज किया गया। पूरे विश्व में चावल भारत पर ही प्रसारित हुआ पश्चिम के तरफ चावल को ले जाने का श्रेय सिकंदर महान को जाता है। इसी तरह अन्य देशों में चावल अलग अलग तरह से गया। जैसे-

   जापान में चावल चीन के रास्ते के द्वारा ले जाया गया। दोस्तों जापान में नए साल के सेलिब्रेशन टैग में चावल के पुआल से बनी रस्सी होती है है ना दिलचस्प बात?

  अब तो आगे भी और भी ऐसी दिलचस्प बात है बस पढ़ते जाइए और आनंद लीजिए।

विश्व में चावल के अलग-अलग नाम है। जैसे भारत में चावल, अंग्रेजी में राइस जिस की संरचना फ्रेंच शब्द ris से हुई है जोकि ग्रीक शब्द oruza से लिया गया है।

अरब व्यापारियों ने इसका नाम और अरारूज रखा। स्पेनिश में इसे अरेजी कहते हैं। ग्रीक में ओरूजा कहते हैं। इटली में इसे रिसो कहते हैं। फ्रांस में रिज, पूर्वी अफ्रीका में वैरि बोलते हैं। इसी तरह दुनिया के अन्य देशों में चावल के अलग-अलग नाम है। तथा हमारी भारतीय संस्कृति भाषा संस्कृत में इसे ब्रीही बोलते हैं।

दोस्तों चावल को धर्म में भी बहुत महत्व दिया जाता है । शायद आपको पता हो लेकिन मैं आपको बता देता हूं की भारतीय संस्कृति में चावल का बहुत महत्व तथा जब भी पूजा होती है चावल को निश्चित रूप में प्रयोग में लाया जाता है। यूं तो हमेशा चावल को हल्दी लगाकर ही पूजा वाले स्थान पर प्रयोग होता है। लेकिन हिंदू धर्म में महादेव जी की पूजा के लिए बिना हल्दी लगाए हुए सफेद चावल ही चढ़ाया जाता है। इसका मुख्य कारण है कि महादेव जी को हल्दी नहीं चढ़ाया जाता।

आइए आप rice plant को उपजाने के बारे में जानते हैं-

चावल की खेती के बारे में जानने से पहले जान लेते हैं चावल के किस्मों के बारे में- वैसे तो पूरे विश्व में चावल की 40000 किस्में होती हैं। अगर केवल भारत की बात करें तो यहां बासमती चावल कुछ ज्यादा ही महत्वपूर्ण है। उसने भी केवल बासमती के 27 किस्में मौजूद है। वैसे भारत में अन्य चावल की किस्में भी हैं जैसे मंसूरी, काला नमक, साठी इत्यादि लेकिन बासमती चावल की 27 किस्मों में मुख्य किस में निम्न है-

  1. बासमती 2000
  2. सुपर करनैल
  3. Pk 395
  4. Pk 179
  5. सुपर फाइन
  6. किरण
  7. परी
  8. देहरादूनी

दोस्तों अगर 40000 किस्मों का नाम लिखूं तो आपको पढ़ना भी मुश्किल हो जाएगा इसलिए अब खेती करने की विधि के बारे में जान लेते हैं।

दोस्तों किसी भेजिए को पनपने के लिए जिस तरह एक नियमित व अनुकूलित वातावरण की जरूरत होती है उसी प्रकार चावल अथवा धान की खेती के लिए बेहतर तथा अनुकूलित वातावरण का होना बहुत ही आवश्यक है। Rice plant की खेती करने के लिए बहुत ही मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपने पूरा पानी ही भरते हैं और अन्य वातावरण का प्रबंध ना करें तब भी धान की खेती होना असंभव है। एक बात और स्पष्ट करता चलूं हर तरह के जीव जंतु या पेड़ पौधे हर जगह की मिट्टी या वातावरण में नहीं हो सकते। चावल के पौधे का वातावरण उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में होता है। मतलब यह है कि ध्रुव प्रदेशों में हम धान नहीं गा सकते हैं चाहे कितनी भी मेहनत कर ले।

rice plant की खेती करने के लिए मुख्यतः प्राकृतिक रूप से निम्नलिखित व्यवस्था होनी चाहिए-

  1. उष्णकटिबंधीय जलवायु
  2. 38 degree centigrade से 45 degree centigrade तक का तापमान
  3. पर्याप्त जल
  4. मानसूनी वर्षा
  5. अनुकूलित मिट्टी

दोस्तों चावल अथवा धान खरीफ फसलों में शामिल है अतः इस का मौसम वर्ष मानसून आने के उपरांत शुरू होता है। जून से लेकर जुलाई तक चावल के पौधों की रोपाई की जाती है कुछ विशेष परिस्थिति में या अगस्त तक भी जा सकती है। क्योंकि यह 60 दिन के अंदर ही हो सकता है। मानसून आने के पहले यह हमें अपने खेत को बेहतर बना लेना चाहिए जैसे कि उसके अच्छे से जुताई करके उसके अंदर के कचरे को साफ करते हैं क्या उसको साफ करते हैं तथा खेत को फ्रेश बनाते हैं।

वैसे तो पहले के समय में लोग मानसून के आने का इंतजार करते थे। लेकिन अब लोग मानसून आने के 10 15 दिन पहले भी आधुनिक मशीनों द्वारा खेत में पानी भर के उसकी अच्छे से जुताई करवा लेते हैं (जिसको हम लेवल लगाना भी कर सकते हैं)। इसके बाद चावल के पौधे को जड़ से उखाड़ ते हैं तथा जुताई किए हुए खेत में रूपाई करते हैं।

अब आपके मन में एक सवाल होगा कि Rice plant आता कहां से है। यह जानने के लिए हम थोड़ा पीछे चलेंगे।

मानसून आने के लगभग 1 माह पहले यानी मई के महीने में दोस्तों हमें धान के बीज की बुवाई करनी पड़ती है यह बीज 15 से 20 दिनों में चावल के पौधे के रूप में 10 से 12 इंच तक बढ़ते हैं। निरामिष चावल के पौधे की रोपाई करते हैं अब सारी बातें समझ में आ रही होंगी।

इन पौधों की रोपाई के बाद खेतों में या रोपाई के पहले खाद डालते हैं जिससे पौधे मजबूती से मिट्टी में पकड़ बना ले और अपने जीवन को मजबूत करें साथ ही साथ आने वाले भविष्य में उपज भी अच्छी करें।

चावल के खेत में पानी की भरपूर मात्रा रहने से या रखने से घास नहीं होते और धान के पौधे के लिए उचित तापमान बराबर बना रहता है। जिसे चावल के पौधे अधिक मजबूत बने रहते हैं तथा अच्छी पैदावार करते हैं।

दोस्तों इस तरह से चावल के पौधे की खेती की जाती है।

आइए कुछ चावल के लाभ के बारे में जान लेते हैं-

चावल खाद्य पदार्थ है जो तुरंत ही ताकत प्रदान करता है। पेट में ठंडक रखता है। चावल वीर्य वर्धक भी है तथा अन्य कई तरह के औषधीय गुण मौजूद हैं जैसे यह गले के स्वर को ठीक करता है चावल को भिगोकर उसके पानी से चेहरा धोने से झुर्रियां मिटती हैं।

आइए चावल से होने वाले कुछ नुकसान के बारे में भी बात करते हैं-

चावल जिस तरह होती गुणों से भरपूर होता है उसी तरह इसकी अधिकता नुकसानदायक हो सकती हैं। जैसे चावल मोटापा को बढ़ाता है, अस्थमा के मरीजों के लिए ये जहर के समान है, मधुमेह को भी बढ़ाने का काम करता है।

अर्थात यह कि चावल के उपयोग की अधिकता आपको समस्या में भी डाल सकता है। कहां जाता है कि अमृत पान की भी अधिकता नुकसानदेह हो सकती है।

दोस्तों अगर चावल के पौधे के बारे में कुछ और जानना चाहते हो तो हमारे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें हम आपके हर सवालों का जवाब देने की भरपूर कोशिश करेंगे।

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